सुबह सलोनी कहां रात बिन ?


शाम अधूरी मीत   याद बिन

उसनींदे दिन मीत साथ बिन !

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हम तो तंतु कसे कसे से

ठोकर से सरगम ही देंगे

सर ढोऎंगें तपन पोटली

अपने तलतट छांह ही देंगें !

 क्योंकर मन में अवगुंठन है 

शाम सुहानी कहां प्रात बिन ?

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मोहक मादक मदिरा भीनी

ओढ़ चुनरिया तापस लीन्हीं

मिलन यामिनी सपनन देखूं

तुम अनदेखे मैं अनचीन्हीं !

अब तो मन में अनुगुंजन है

सुबह सलोनी कहां रात बिन ?

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