सुर्खियों से दूर रहे स्वातंत्र्यवीर : श्री मांगीलाल गुहे


1233025_514823345260115_1047352775_o

 

 
 
श्रीयुत पं. मांगीलाल गुहे 
पिता स्व.शिवकरण गुहा 
जन्म :- 10.10.1926,
जन्म स्थान :- हरदाविचारधारा :- गांधीवादी,
श्रीयुत मांगीलाल जी गुहे को भारत के महमहिम राष्ट्रपति ने 13.08.2013 को सम्मानित किया उनके इस यश की अर्चना की नार्मदीय ब्राह्मण समाज जबलपुर ने कर्मयोगी भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव.पर आयोजित एक आत्मीय आयोजन में किया .   श्रीयुत गुहे ने गांधी जी के निर्देशों पर सदा अमल किया1942 में महा. गांधी के “करो या मरो” नारे से प्रभावित होकर अंग्रेज सरकार की पत्राचार व्यवस्था को खत्म करने हरदा के लेटर बाक्सों को बम से नेस्तनाबूत किया,साथ ही डाक गाड़ी के दो डब्बों के बीच यात्रा करते हुए रस्सी में हंसिया बांध कर रेल लाइन के किनारे के टेलीफ़ोन तारों को काटा ताकि टेलीफ़ोनिक एवम टेलीग्राफ़िक संचार व्यवस्था छिन्न भिन्न हो हुआ यही .उनकी ज़रा सी चूक जान लेवा हो सकती थी. पर युक्तियों और सतर्क व्यक्तित्ववान श्री गुहे ऐसा कर साफ़ बच निकले. 
       श्री गुहे बताते हैं कि मुझसे लोग दूरी बनाते थे . ऐसा स्वभाविक था. लोग क्यों अग्रेजों के कोप का शिकार होना चाहते. 
श्रीयुत गुहे हमेशा कुछ ऐसा कर गुज़रते जो विलायती कानून की खिलाफ़त और बगावत की मिसाल होता पर हमेशा  वे सरकारी की पकड़ में नहीं आ पाते .कई बार ये हुआ कि अल्ल सुबह हरदा की सरकारी बिल्डिंग्स पर यूनियन जैक की जगह तिरंगा दिखाई देता था. ये करामात उसी क्रांतिवीर की थी जिसे तब उनकी मित्र मंडली मंगूभाई के नाम से सम्बोधित पुकारती थी.उनका एक ऐसा मित्र भी था जो सरकारी रिश्वत की गिरफ़्त में आ गया उसने श्री गुहे को बंदी बनवा दिया. जब मैने मित्र के नाम का उल्लेख करने की अनुमति चाही तो दादाजी ने कहा-“मुझमें किसी से कोई रागद्वेष के भाव नहीं मैं तो देश को आज़ाद हवा दिलाना चाहता था मेरा उद्देश्य पूर्ण हुआ.मै उसे आज भी मित्र मानता हूं हो सकता है कि उसका परिवार मेरी गिरफ़्तारी के धन से भोजन कर सका हो.अथवा उसकी ज़रूरते पूरी हुईं हों. .!”
ऐसे महान विचारक श्रीयुत गुहे जी पर हमें गर्व है.
  साथ ही टेलीग्राफ़िक संचार व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने हंसिये को रस्सी से बांधकर हावड़ा मेल में बैठकर रेलवे लाइन के किनारे वाले टेलीफ़ोन के तार घात लगाके काटे जो एक दुस्साहसिक कार्य था. श्री गुहे जी को उनके एक सहयोगी आंदोलनकारी ने अंग्रेज सरकार से रिश्वत लेकर जेल भिजवाया. वे 21 माह तक जेल में रहे ….

सदा ही हौसलों से संकटों समस्याओं को चुनौती देने वाले श्री गुहे जी का जन्म 10 अक्टूबर 1926 को हरदा में हुआ. आपके पिता श्री शिवचरण गुहे कृषक थे.ये दौर भारतीय कृषकों के लिये अभाव एवम संघर्ष का दौर था. एक ओर अभाव दूसरी ओर सामाजिक अंग्रेज़ सरकार की दमनकारी नीतियों से किशोरावस्था में ही विद्रोही हो गये थे गुहे जी. गांधीजी के आह्वानों का असर उनके किशोर मन पर अवश्य पड़ता था. मुझसे उनकी हुई कई वार्ताओं में अक्सर मुझे महसूस हुआ कि कभी भी अन्याय को सहन न करने वाले दादा जी का सेनानी होना स्वभाविक ही रहा होगा.उनके संवादों में सादगी, लोगों के प्रति विश्वास का भाव उनकी गुणात्मक विशेषता थी. स्वभाव से घुमक्कड़ श्री गुहे ने सारे देश का भ्रमण किया तीर्थ यात्राएं तो एकाधिक बार कर चुके थे.

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s