जिधर भी देखता हूँ , बस तुम्हारा ही उजाला है .


तस्सवुर में तुम्हारी सादगी का बोलबाला है
भरी थाली रुके हाथ जिसमें बस इक निवाला है !
दरो दीवार पे तुम्हारा मुस्कुराता अक्स देखा है…
जिधर भी देखता हूँ , बस तुम्हारा ही उजाला है .
ये दुनियाँ देख लगता – “हर ओर तुम ही हो ..”
चाँद,सूरज,धरा, तारे, सभी को तुमने पाला है .
तुम्हारे नेह का संदल मेरे हर रोम में बाक़ी –
जो जितना भी दिया तुमने उसे हर पल सम्हाला है.
अजन्मे देवता जलते हैं मुझसे जानता हूँ मैं –
मैं जब कहता हूँ मुझको मेरी माँ ने पाला है…!!

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