बार बार मुम्बई से बनारस तक चीख चीख के उभरती


बार बार मुम्बई से बनारस तक चीख चीख के उभरती आवाज़ों से ना वाक़िफ़ तुम!!

बार बार मुम्बई से बनारस तक
चीख चीख के उभरती आवाज़ों
से ना वाक़िफ़ तुम!!
किसे विश्व के सबसे बड़े प्रज़ातंत्र के
की दम्भोक्ति सुना रहे हो ?
किसे संप्रभुता सम्पन्न होने का
एहसास दिला रहे हो ?
कौन हो तुम
किस लिये हो तुम
सवाल ज़रूरी था सो पूछ बैठा !
माफ़ करना तुम्हारे खादी के रुमाल
से तुमको माथा पौंछने
बार बार मज़बूर कर देता हूं न ?
क्या करूं कवि जो हूं
तुम्हारा बयान आएगा जो तुम्हारा
कारकून टाईप कर लाएगा
तुम हरेक घायल से मरने वालों तक
मुआवज़ा दोगे सहानुभूति भरे रुदन के साथ
तुम किसे क्या बताने जा रहे हो
नौकरी देने वाला भारत
सिरमौर भारत
कल की सर्वशक्तिमान भारत
एक फ़िर से ऊगता भारत
इन भ्रमों से कब तलक बहलाओगे
बताओ और कब तक और रुलाओगे..?

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2 comments

  1. तुम किसे क्या बताने जा रहे हो
    नौकरी देने वाला भारत
    सिरमौर भारत
    कल की सर्वशक्तिमान भारत
    एक फ़िर से ऊगता भारत
    इन भ्रमों से कब तलक बहलाओगे
    बताओ और कब तक और रुलाओगे..?

    ….. रोते रोते जब आखें लाल हो जायेंगी शायद तब….!! शायद घड़े आजकल भरते नहीं हैं

  2. माफ़ी चाहूँगा मुकुल भाई… मै आपके ब्लॉग पर पहली बार आया … देर से आया इस लिए… आप इतना अच्छा लिखते हैं ये तो पता था लेकिन ब्लॉग पर नहीं पहुँच पाया था… सब्सक्राइब कर रहा हूँ

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